हज़ार वजहें हैं खुश रहने की… फिर भी न जाने क्यों उदास रहते हैं।
सोचू तो बिखर जाऊं, ना सोचूं तो किधर जाऊं…!
जिसको चाहा वो मिला नही, जो मिला उससे मोहब्बत ना हुई…!
तो फिर इस बीमारी की दवा क्यों नहीं मिलती?
झूठी दुनिया और झूठे लोगों के बीच निभ नहीं पाता।
थक के बैठ जाऊं तो गले से लगा लेना ए जिंदगी अब किसी से उम्मीद नही रही हमें इस फरेबी जमाने में
मोहल्ले की मोहब्बत का भी अजीब फसाना है,
नया कपड़ा क्या पहन लिया अब तो बात भी नही करते…!
मगर क्या करूँ, मैं अपनी मोहब्बत से Sad Shayari in Hindi हारा हूँ।
तेरी यादों के साये मुझे हर रोज़ जलाते हैं।
आज कल लोग मिलते किसी से है और होते किसी के हैं…!!!
हम भी चकनाचूर हो गए… दिल संभालना मुश्किल हो गया है।
यूँ भरी महफ़िल में तमाशा ना बनाया करो।
वरना कुछ पल का साथ तो जनाजा उठाने वाले भी देते है…!